Question 1(a) · 10 marks · 164 words written
Opening
उपर्युक्त तथ्य जैन धर्म के स्यादवाद से अभिप्रेरित है। जिसके मूल में किसी भी वस्तु या ज्ञान का निरपेक्ष न होकर सापेक्ष होना है। इसी कारण सत्य का भी पक्ष किसी व्यक्ति के लिए कुछ भी हो सकता है। यह उसकी भौतिक, मानसिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इस तथ्य का आधुनिक समय में बहुत महत्व है। जहाँ कट्टरता तथा असहिष्णुता बढ़ती जा रही है। व्यक्ति
Body · continuous prose
None written.
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केवल खुद के पक्ष को सही समझता है। और इसलिए दूसरों के विचारों तथा उसके पक्ष को जानने का प्रयास भी नहीं करता है। फलस्वरूप समाज में भीड़ द्वारा हत्या, आतंकवाद जैसी घटनाओं में वृद्धि हो रही है। यदि हम सहिष्णुता के नियम का पालन करते हुए विभिन्न व्यक्तियों के विचारों को समझेंगे तो न केवल नये विचारों का सृजन होगा अपितु मानव समाज में हिंसा, क्रोध आदि की समाप्ति की होगी। शायद इसीलिए स्यादवाद के सापेक्षिक नियम का महात्मा गाँधी पर इतना व्यापक प्रभाव पड़ा और उन्होंने इसे अपने जीवन में उतारा और सम्पूर्ण भारत को लाभान्वित भी।