Question 1(a) · 10 marks · 224 words written
Opening
अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों के लिए आदर्श नैतिक ढाँचा विश्व शांति एवं समग्र विकास के आदर्शों को प्राप्त करने की दिशा में प्रभावी कदम साबित होगा।
Body · continuous prose
वस्तुतः अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर शरणार्थी समस्या से लेकर, सामरिक वर्चस्व की इच्छा; भुखमरी-अकाल आदि की स्थिति में वैश्विक मदद का अभाव, के मूल में जाकर देखें, तो अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों के परिपेक्ष में नैतिक ढाँचे का अभाव ही दृष्टिगत होता है। संकुचित राष्ट्रवाद की अवधारणा व्यापक स्तर पर न केवल सामंजस्य स्थापना की अवरोधक बनती है, बल्कि मानव जाति के विकास के लिए आवश्यक संसाधनों को विनाशात्मक दिशा की तरफ मोड़ती है।
पिछले दशक में इराक में अमेरिकी सैन्य कार्यवाही, क्रीमिया मुद्दे पर रूस का आक्रामक रूप, स्वयं राष्ट्रों द्वारा आतंकियों का पोषण उपर्युक्त स्थितियों की स्पष्ट व्याख्या कर देते है।
यद्यपि संयुक्त राष्ट्र संघ, शांति सेना, गुटनिरपेक्षता जैसे लम्बे समय से चले आ रहे प्रयत्न हों या हालिया नाभिकीय सुरक्षा सहयोग जैसी प्रक्रियाएँ ये सभी कमोबेश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसी नैतिक ढाँचे के निर्माण को दर्शाते है, जिसका अपेक्षा मानव जाति को है, किंतु दृढ़ इच्छाशक्ति के अभाव व प्रभुत्व स्थापना की इच्छा की प्रबलता के कारण ये प्रयास सीमित स्तर पर ही सफल हो पाए हैं।
Close · a way forward
अतः अंतरराष्ट्रीय समुदाय को समावेशी व भेदभाव रहित विचारधारा के आधार पर ऐसे नैतिक ढाँचे के निर्माण को प्रोत्साहित करना चाहिए, जिसका अंतिम लक्ष्य सामंजस्य स्थापना के साथ मानवजाति का समग्र विकास हो।