AIR 263 · CSE 2016 · GS4 · 60 pages

Kachan Kumar Kandpal: GS4 answer copy

23 answers by Kachan Kumar Kandpal, as written in the test. Each question opens a page with how other toppers answered it.

The questions

  1. Q9(c)(c) इस परिस्थिति से निपटने के लिए आपके पास कुछ विकल्प हो सकते हैं: * जैसा मंत्री ने कहा है वैसा कीजिए.. * परिणामों को प्रकाशित करने का आग्रह कीजिए और जनता को निर्णय करने दीजिए कि क्या वह इस योजना को चाहती है या नहीं? * एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कीजिए और इस योजना के परिणामों तथा मंत्री के संवेदनहीन रवैये के बारे में मीडिया को संक्षिप्त वृत्तांत दीजिए। कोई अन्य संभव विकल्प सुझाइए उन सभी का मूल्यांकन कीजिए और अपने कारण बताते हुए उनमें से सबसे अच्छे विकल्प का सुझाव दीजिए।
  2. Q1120 marks
  3. Q12(a)(a) अपनी वर्तमान जिम्मेदारियों और भविष्य की अपेक्षाओं को सामने रखते हुए इस प्रकरण में शामिल विभिन्न नैतिक मुद्दों की पहचान कीजिए। (b) आपसे विस्तृत जानकारी हेतु दबाव डालने के संबंध में विभागीय अधिकारी के संभावित उत्प्रेरणाओं पर चर्चा कीजिए। (c) ऐसी स्थिति में आप क्या निर्णय लेंगे? अपने तर्क को औचित्यपूर्ण सिद्ध कीजिए।
  4. Q12(b)(a) अपनी वर्तमान जिम्मेदारियों और भविष्य की अपेक्षाओं को सामने रखते हुए इस प्रकरण में शामिल विभिन्न नैतिक मुद्दों की पहचान कीजिए। (b) आपसे विस्तृत जानकारी हेतु दबाव डालने के संबंध में विभागीय अधिकारी के संभावित उत्प्रेरणाओं पर चर्चा कीजिए। (c) ऐसी स्थिति में आप क्या निर्णय लेंगे? अपने तर्क को औचित्यपूर्ण सिद्ध कीजिए।
  5. Q12(c)(c) ऐसी स्थिति में आप क्या निर्णय लेंगे? अपने तर्क को औचित्यपूर्ण सिद्ध कीजिए।
  6. Q1320 marks

The answers

Question 1(a) · 10 marks · 224 words written

A broad ethical framework as a guiding light for international relations will not only ensure harmonious relations between nations but will also lead to progress of the human race. Discuss with examples.

Opening

अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों के लिए आदर्श नैतिक ढाँचा विश्व शांति एवं समग्र विकास के आदर्शों को प्राप्त करने की दिशा में प्रभावी कदम साबित होगा।

Body · continuous prose

वस्तुतः अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर शरणार्थी समस्या से लेकर, सामरिक वर्चस्व की इच्छा; भुखमरी-अकाल आदि की स्थिति में वैश्विक मदद का अभाव, के मूल में जाकर देखें, तो अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों के परिपेक्ष में नैतिक ढाँचे का अभाव ही दृष्टिगत होता है। संकुचित राष्ट्रवाद की अवधारणा व्यापक स्तर पर न केवल सामंजस्य स्थापना की अवरोधक बनती है, बल्कि मानव जाति के विकास के लिए आवश्यक संसाधनों को विनाशात्मक दिशा की तरफ मोड़ती है।

पिछले दशक में इराक में अमेरिकी सैन्य कार्यवाही, क्रीमिया मुद्दे पर रूस का आक्रामक रूप, स्वयं राष्ट्रों द्वारा आतंकियों का पोषण उपर्युक्त स्थितियों की स्पष्ट व्याख्या कर देते है।

यद्यपि संयुक्त राष्ट्र संघ, शांति सेना, गुटनिरपेक्षता जैसे लम्बे समय से चले आ रहे प्रयत्न हों या हालिया नाभिकीय सुरक्षा सहयोग जैसी प्रक्रियाएँ ये सभी कमोबेश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसी नैतिक ढाँचे के निर्माण को दर्शाते है, जिसका अपेक्षा मानव जाति को है, किंतु दृढ़ इच्छाशक्ति के अभाव व प्रभुत्व स्थापना की इच्छा की प्रबलता के कारण ये प्रयास सीमित स्तर पर ही सफल हो पाए हैं।

Close · a way forward

अतः अंतरराष्ट्रीय समुदाय को समावेशी व भेदभाव रहित विचारधारा के आधार पर ऐसे नैतिक ढाँचे के निर्माण को प्रोत्साहित करना चाहिए, जिसका अंतिम लक्ष्य सामंजस्य स्थापना के साथ मानवजाति का समग्र विकास हो।