GS4 · 10 marks · 150 words

What do you understand by 'civic virtue' in public life? What are the challenges in practising it in today's time? How can these challenges be overcome?

Answered by 7 toppers · CSE 2017–2019

Syllabus: Ethics and Human Interface: Essence, determinants and consequences of Ethics in-human actions; dimensions of ethics; ethics - in private and public relationships. Human Values - lessons from the lives and teachings of great leaders, reformers and administrators; role of family society and educational institutions in inculcating values.

How toppers approached it

From all 7 answers · about 160 words.

Opening

  • A definition86%
  • No separate opening14%

Body

  • Points100%

Close

  • A summary43%
  • No separate close29%
  • A way forward29%

The toppers’ answers

Pratham KaushikAIR 5 · CSE 2017 · 341 wordsTheir whole copy

Opening · a definition

सभ्य समाज के निर्माण में 'नागरिक सदगुण' (Civic Virtue) का अर्थ उन गुणों या व्यवहारों से है जो एक नागरिक को अपने समुदाय, राज्य या राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार बनाते हैं। यह केवल कानून का पालन करना नहीं है, बल्कि सार्वजनिक हित को निजी स्वार्थ से ऊपर रखकर समाज के प्रति सक्रिय योगदान देना है। अरस्तू के अनुसार, यह राज्य के मामलों में सहभागिता और सदाचारी होने का मेल है।

Body · points

वर्तमान समय में इनके अनुसरण में आने वाली चुनौतियाँ:

  1. व्यक्तिवाद और भौतिकवाद का बढ़ता प्रभाव: आज समाज में 'मैं' की भावना 'हम' की भावना पर हावी हो रही है। लोग व्यक्तिगत उन्नति को सामाजिक भलाई से अधिक महत्व दे रहे हैं।
  2. डिजिटल युग की चुनौतियाँ: सोशल मीडिया पर फैलती भ्रामक सूचनाओं (Misinformation) और ध्रुवीकरण के कारण नागरिक विमर्श का स्तर गिर रहा है।
  3. उदासीनता: लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में नागरिकों की भागीदारी केवल मतदान तक सीमित हो गई है। स्थानीय मुद्दों पर ध्यान न देना एक बड़ी समस्या है।
  4. नैतिक पतन: सार्वजनिक जीवन में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनैतिक व्यवहार ने 'नागरिक कर्तव्य' के प्रति विश्वास को कम किया है।
  5. असहिष्णुता का बढ़ना: वैचारिक भिन्नता को स्वीकार न करना और असहिष्णुता का प्रदर्शन नागरिक सद्गुण के मार्ग में बाधक है।

इन चुनौतियों से निपटने के उपाय:

  • शिक्षा में सुधार: स्कूलों और कॉलेजों में 'नागरिक शिक्षा' (Civic Education) पर जोर देना ताकि बच्चों को बचपन से ही कर्तव्यों का बोध हो।
  • सामुदायिक सहभागिता: स्थानीय निकायों, स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशंस के माध्यम से सामुदायिक कार्यों में भागीदारी बढ़ाना।
  • डिजिटल साक्षरता: सोशल मीडिया का उपयोग जिम्मेदारी के साथ करना और गलत सूचनाओं को रोकने के लिए जागरूक नागरिक बनना।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही: सार्वजनिक संस्थानों द्वारा पारदर्शिता को बढ़ावा देना ताकि नागरिकों का विश्वास बहाल हो सके।
  • नेतृत्व का उदाहरण: समाज के प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा नैतिकतापूर्ण आचरण प्रस्तुत करना ताकि आमजन उनसे प्रेरित हो सकें।

Close · a summary

निष्कर्षतः, 'नागरिक सदगुण' एक स्वस्थ लोकतंत्र की आधारशिला है। जब नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति जागरूक होंगे, तभी एक न्यायपूर्ण और सहभागी समाज का निर्माण हो सकेगा।

More on Human Values

Values as such and where they come from: lessons from the lives of leaders, reformers and administrators, and the values named in the syllabus.

All GS4 questions on Human Values